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Shyam Singh
Devraha Baba lived for more than 250 years
 

Sri Devraha Baba has been venerated as Satguru and is symbolic of the rich tradition of yoga and saintly devotion inherent in India..

कृपा बहुत बड़ी चीज़ है. मैंने कहा था कि भगवान पर विश्वास रखिये संसार पर नहीं. अगर मेडिकल रिपोर्ट सही नहीं है तो आपके पास दो विकल्प हैं या तो डॉक्टर की बात के आधार पर अपना भविष्य सोच लो और दुखी हो जाओ या फिर इस पर विश्वास रखो कि प्रभु सर्वसमर्थ हैं, सब कुछ कर सकते हैं, मैं रोगमुक्त हो जायूँगा.. बस, दूसरी बात को पकड़ लो और अब इसका कोई विकल्प मत रखो.. इसकी बड़े विस्तार से चर्चा मैंने अपने पूर्व के लेख में कर रखी है और साथ में मैंने कहा था कि मानो प्रभु हमसे कह रहे हैं “मेरी नज़रों की तरफ देख ज़माने पे न जा”... आज आपको एक सत्य घटना सुनाता हूँ जो आपके संकल्प को प्रबल करेगी और विकल्पों का नाश करेगी.. घटना फिर से मेरे पूज्य ब्रह्मर्षि देवराहा बाबा की कृपा की है.

डॉ. लालजी सहाय हिंदू कालेज अस्पताल, जमानियां, गाजीपुर में चिकित्सा पदाधिकारी थे. उनकी पुत्री गीता जब केवल आठ वर्षों की ही थी तब से यकृत के स्थान पर उसे एक भयंकर फोड़ा हो गया था. पूरा परिवार चिंता-ग्रस्त था. डॉ. सहाय के मित्र काशी हिंदू विश्वविद्यालय के सुख्यात सर्जन थे. वे आपरेशन करने को प्रस्तुत हुए किन्तु उन्हें भय लगा कि यकृत खुल जाने के कारण बच्ची की जीवनरक्षा करना कठिन होगा. इसी भय के कारण गीता को उन्होंने टेबुल पर से हटा दिया. अतः सर्जन की कला एवं चीर-फाड़से भी गीता के स्वस्थ होने की आशा समाप्त हो गयी थी.
इसी बीच अचानक गीता की माँ ने पूज्य बाबा का स्पष्ट दर्शन घर पर ही किया. बाबा ने बच्ची के फोड़े पर हाथ फेरा और स्नेह पूर्वक उसे दुलारते हुए कहा- ‘सब ठीक हो जायेगा’.
गीता की माता को ढाढस बंधा कर बाबा अंतर्धान हो गए.
दूसरे दिन एक साधारण देसी उपचार मात्र से फोड़ा फट गया और सारा दूषण रक्त बाहर निकल गया. घाव धीरे-धीरे सूखता गया. एक सप्ताह के अन्दर ही गीता का सारा कष्ट समाप्त हो गया.
दयानिधान भगवद स्वरूप अनंतश्री देवराहा बाबा अपने भक्तों एवं सज्जनों पर सदैव दया की वर्षा करते रहते हैं.

बाबा आज भी हैं और हम सब के लिये हैं. जो-जो भी मेरा सन्देश पढ़ रहे हैं उन सब पर बाबा की कृपा है. ऐसा बिलकुल मत सोचना कि जो गीता के साथ हुआ वो आपके साथ नहीं हो सकता. फिर से कहूँ आस्तिक वो है जो मानता है कि भगवान है पर भक्त वो है जो मानता है कि भगवान मेरे लिये है.. भक्त बनिए.. भगवान को अपना मानिये.. आपका जीवन बदल जायेगा.. अच्छे, अच्छे, बहुत अच्छे के लिये...

डॉ. सुमीत

https://www.facebook.com/devraha


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